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Thought of the author | Lekhak Ke Vichar | लेखक के विचार | Shivanand-Verma

लेखक -शिवानन्द वर्मा के विचार



मीठा बोलने वाला प्रत्येक व्यक्ति,
स्वभाव से मीठा नहीं होता ,
पल भर में नमक से भी कड़वा ,
और ज़हर से भी ज़हरीला हो सकता है

- ✍️ शिवानन्द वर्मा

🔅

बेवजह सन्देह की एक चिंगारी,
वर्षों की खुशियों को राख में तब्दील कर देती है,
साकार होने से पहले ही धराशाई हो जाती हैं ख्वाहिशें,
तक़दीर भी जीवन को कुछ ऐसे बेरंग कर देती है।

- ✍️ शिवानन्द वर्मा

🔅

अपने हों या पराए,
सबकी नजरों में आपकी अहमियत उतनी ही है, जितनी की रेगिस्तान में प्यास लगने पर यदि समन्दर भी मिल जाए तो उसका पानी पीकर उसे सुखा देने की लालसा जबकि चन्द घूँट में प्यास बुझ जाने पर उसकी तरफ मुड़ कर भी न देखना।

- ✍️ शिवानन्द वर्मा
🔅
किसी की साफ़ सुथरी छवि को,
पत्थर की लकीर समझने की भूल न करें,
मौका परस्त इन्सान सदियों से,
गिरगिट को मात देने में अव्वल रहा है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
ईश्वर ने आपको खूबसूरत काया प्रदान किया ,
परन्तु उस खूबसूरत काया के लिए खूबसूरत चरित्र निर्माण आपकी जिम्मेदारी है। 
 -शिवानन्द वर्मा
🔅
अंधविश्वास वो नहीं, जिनके भ्रम में पड़कर लोग ठग लिए जाते है,
अंधविश्वास वो है , जब अपने भरोसेमंद अपना ही गला काट देते हैं।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
प्रतिस्पर्धा के आधुनिक दौर में अपनी कीमत इतनी भी कम मत कर लेना,
की तुम स्वयं से ही स्वयं को मूल्यहीन पाओ। 
     -शिवानन्द वर्मा
🔅
अपने विचारों और स्वयं को इतना भी पारदर्शी मत बनाएं ,
की लोग आपकी कमियों को जानकर अपना स्वार्थ सिद्ध करने में जुट जाएँ। 
-शिवानन्द वर्मा

shivanand verma
Shivanand verma 

🔅
रिश्तों का अस्तित्व बचाये रखना है तो 
परिवार के सभी सदस्यों के साथ मित्रवत व्यव्हार बनाये रखना ही पर्याप्त नहीं है ,
वरन अपने से बड़ों के लिए सम्मान , बराबरी वालों के साथ सामंजस्य और छोटों के लिए अनुशासन 
बहोत जरुरी है , यदि ऐसा नहीं करेंगे तो ऐसा समय आएगा 
जब आपके क्रोध या पछतावे के सामने सभी रिश्ते-नाते बौने नज़र आयेगें। 
-शिवानन्द वर्मा

Shivanand Verma Motivational Quotes 7
-शिवानन्द वर्मा

🔅
संपन्न और सुखी होने में उतना ही अंतर है , जितना धरती और आकाश में,
सम्पन्नता जरूरतों को पूर्ण कर सकती है पर जरूरी नहीं की हर संपन्न सुखी हो ,

प्रत्येक हालातों में संतुष्टि ही परम सुख कहलाता है , 
जहाँ और पाने व चाह में किसी भी हद तक 
सही - गलत विचारे बिना कुछ भी कर गुजरने की अभिलाषा न हो। 
- शिवानंद वर्मा

शिवानंद वर्मा
शिवानंद वर्मा

🔅

यदि आपको किसी की बातें अच्छी लगती हैं ,
किसी का व्यवहार अच्छा लगता हो ,
कोई बहोत ही आकर्षक लगता है ,
उससे जुड़े रहने की प्रबल कामना रहती है। 

तो कुछ ऐसा भी करें की उसके क्रोध के भी दर्शन हो जाएँ ,
चाहे कल्पना ही क्यों न करनी पड़े ?
नहीं तो बहोत देर बाद यदि उसके क्रोध का सामना करना पड़े तो ,
परिस्तिथियाँ भयानक हो सकती हैं। 
-शिवानन्द वर्मा

Shivanand-Verma
Shivanand-Verma
🔅
जानते हुए भी असंभव के लिए संभावना रखना,
आकाश की ऊंचाई और समुद्र की गहराई मापने के समान है।
- शिवानंद वर्मा

shivanand verma
Shivanand verma 

🔅
मैं ज़िन्दगी की किताब को वो आखरी पन्ना हूँ 
जिसको अच्छा लगे तो आगे के पन्ने मुझमें तलाशता है,
जिसको अच्छा ना लगे, वो सोचता है, 
चलो अच्छा हुआ एक बोझ हट गया 
-शिवानन्द वर्मा

Shivanand-Verma
Shivanand-Verma



🔅
कल्पनाओं में वो ताकत होती है,
जो हर असंभव की संभव अनुभूति करा देती हैं 
- शिवानंद वर्मा

Shivanand-Verma


🔅
प्रायोजित कार्य को बदला जा सकता है,
परन्तु प्रकृति के बदलाव का कोई विकल्प नहीं है 
- शिवानन्द वर्मा

Shivanand-Verma


🔅
कल्पनाएं जीने का हौसला बढ़ाती है,
वरना हकीकत तो कबकी जान ले चुकी होती।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
 सपने देखने हैं और उन्हें साकार कर दिखाना है, 
तो खुली आँखों से देखो,
जो निरंतर तुम्हारे मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करें, 
क्योंकि सपने वही साकार होते हैं, जो खुली आँखों से देखे जाएं,
बन्द आँखों से कोई भी देख सकता है और 
आँखे खुलते ही सपने ओझल हो जाते हैं। 
- शिवानन्द वर्मा
🔅
हमारी काबिलियत पर उंगलियां उठाने वालों, तुम्हें क्या पता?
"बिना घूस दिए सरकारी नौकरी नहीं मिलती"
 या
 "इतने लाख घूस देकर सरकारी नौकरी मिली है"
इन्हीं शब्दों को सुनकर ही अनगिनत प्रतिभाओं ने 
दम लगाने से पहले ही दम तोड़ दिया।
सिर्फ इसलिए कि वो इतने सक्षम नहीं की
 लाखों की धनराशि में घूस दे सकें।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
जब आपके अपने मित्र या संबंधी आपके सहयोग की तुलना
धन से करने लगें तो समझ लेना आप से उनका संबंध
 सिर्फ स्वार्थ आधारित है, सहयोगार्थ नहीं।.
 - शिवानन्द वर्मा
🔅
अपने कार्य मे दक्ष प्रत्येक जीव, "ग्रेड्यूट" होता है, वह चाहे जो भी हो, 
उससे भिन्न जीव उसके समान दक्ष नहीं हो सकते।
और इंसान किताबी ज्ञान लेकर खुद को सबसे अक्लमंद समझता है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
दिखावे की जश्न और पार्टियां मुबारक हो ज़माने को,
ख्वाहिश नहीं है मेरी, मैं किसी भीड़ का हिस्सा बनूँ,
जिसे ना टूटने का दर्द हो, ना बिछड़ने का गम हो।
मेरी चाहत है मैं सिर्फ स्वयं और स्वयं का किस्सा बनूँ।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
बड़ी फ़िक्र रहती थी जिन्हें हमारी,
जो हमारे लंगोटिया यार कहलाने लगे,
जिस वक्त सख़्त जरूरत थी उनकी,
वो सैकड़ों बहाने कर-करके दूर हमसे जाने आगे।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
फूल सा व्यवहार समझकर जिनसे भी जुड़े हम,
जो कुछ समय के लिए बड़े वफादार निकले,
जब आई मुसीबतों की घड़ियां हम पर,
तब वो दो देशों की सीमाओं को बांटने वाले नुकीले तार निकलें।
- शिवानन्द वर्मा

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जरूरी नहीं आपने जो सीखा वही करें।
जरूरी नहीं की आपकी शुरू से
जो काबिलियत है वही करें।
जरूरी नहीं कि अपने शौक को ही
अपनी आय का जरिया बनाया जाय।
ज़रूरी वो करना है जिससे आपकी
और आपके ऊपर आश्रितों की
जरूरतें पूरी हो सकें।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
औरों से सुना करते हैं,
कि हमारी गैरमौजूदगी में लोग
अक्सर हमारी बातें किया करते हैं,
अरे... कभी हमारे सामने भी दो बोल, बोल देते,
तो कम से कम ये तो पता चल जाता,
की उनकी नज़रों में हमारी अहमियत क्या है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
इतने भी बुरे ना बन जाओ,
की तुम्हारी मौत पर अफ़सोस के बजाय,
ज़माना खुशियाँ मनाए।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
वो शहरी छोरी…........
क्योँ तेरी छोटी सी मुस्कान पर हम अपना दिल हार बैठें,
जब देखा कितनों के हाथों में तेरा हाथ,
तो हम गाँव के गँवार ही सही ,
यही हकीकत है ये मान बैठे।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
मेरी खामोशी को
मेरी कमज़ोरी समझने की भूल मत करना,
ये तूफान के आने से पहले का सन्नाटा है...
- शिवानन्द वर्मा
🔅..
CAA के विरोधियों, महामूर्ख हो तुम,
क्या सरकार को मालूम नहीं,
CAA के समर्थन में प्रत्येक भारतीय
उनके साथ है।
या तो तुम्हारे दिमाग में CAA के सम्बंध
में गंदगी घोली गई है,
या तो तुम पक्के घुसपैठिये हो।
- शिवानन्द वर्मा
🔅


मुफ्तखोरी और घुसपैठियों के सामने,
राष्ट्रवाद ने घुटने टेक दिए,
कुत्तों को मुफ्त की रोटियां ही भाती हैं,
तभी तो केजरी ने बिजली और पानी फेंक दिए।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
दिल्ली के जघन्य निर्भया रेप काण्ड में
एक साधारण घर की बेटी की जगह,
यदि किसी नेता, अभिनेता,
सर्वोच्च पदों पर विराजमान
सरकारी बाबू या अवार्ड वापस
करने वाले बुद्धिजीवियों की बेटी होती।
तो फाँसी भी कब की हो चुकी होती ,
और नया कानून भी बन गया होता।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
सोशल मीडिया पर
लाइक और शेयर
ज़िंदगी का वो हिस्सा बन गये है,
जिनके आगे साँसों की भी कोई कीमत नहीं।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
कितने ही देशभक्त अंग्रेजों , मुगलों , तमाम विदेशी घुसपैठियों से देश के लिये लड़ते लड़ते शहीद हो गए, आज़ादी के बाद कांग्रेस की तत्कालीन सरकार की कुटिल राजनीति में, सब गुमनाम हो गए, जरूरत है स्कूलों में प्रचलित कांग्रेस की बनावटी इतिहास की किताबों के वहिष्कार की और भारतीय योद्धाओं के साहस और पराक्रम को नई पीढ़ी के लिए किताबों में पुनर्गठन की।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
एक सोनम कपूर डर गई,
बॉलीवुड से लेकर मीडिया तक मे हंगामा हो गया,
कितनी बहू- बेटीयाँ रोज शिकार हो जाती हैं,
पर सबके नसीब में "हैदराबाद की बेटी के जैसा न्याय" कहाँ।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
फ़िल्मी पर्दों की अभिनेत्रियाँ, कम या छोटे कपड़े पहन कर, सार्वजनिक रूप से टेलीविजन एवं इंटरनेट के द्वारा मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से हमारे / आपके घरों तक पहुंच रही हैं, कम वस्त्र पहनना या अपने निजी अंगों का पूर्ण या आंशिक रूप से प्रदर्शन करना उनकी कमाई का जरिया है, जो उन्हें करना ही है।

अपनी बेटियों को समझाए, जो की उनका अनुकरण करकर भारतीय सभ्यता और संस्कृति का अनादर कर रही हैं।

उन्हें इस बात की तनिक भी जानकारी नहीं है, की उनके द्वारा उठाया गया ये कदम उनके भविष्य के लिए कितना घातक है।

हमनें कई बार देखा है, लोग छोटी छोटी बच्चियों को भी इस तरह के कपड़े पहनाते हैं और उनके रूप को देखकर खुश होते हैं, वो भूल जाते हैं कि बड़ी होकर जब वही बेटी शारीरिक अंगों को दिखाने वाले कपड़े पहनेगी तो वो उसे कैसे रोक सकेंगे।

आपकी बेटी इनके तरह के कपड़े पहने या खरीदने की जिद करे , तो इसे अनदेखा ना करें ।
यह दिमाग में बजने वाली पहली घण्टी है, जो आपको सतर्क कर करती है, अपनी बेटी या बहू की आबरू को सरेआम प्रदर्शन से रोक सकें।

इन प्रदर्शनों या पहनावों को अचानक रोका नहीं जा सकता, पर अपनी संतानों को इन पहनावे / प्रदर्शनों का मूल कारण बताकर उनके
- शिवानन्द वर्मा

🔅

किसी ज़माने में इंसान हुआ करते थें धरती पर, जो अपने पराये, सबकी मदत किया करते थें,
झगड़े होने पर बीच बचाव किया करते थे, गलतियों होने पश्चाताप किया करते थे,
घायलों को इलाज़ और भूखे भोजन दिया करते थें।
इस तरह के बहोत से परोपकार किया करते थें।
अब सिर्फ और सिर्फ, भेंड़ की चाल चलने वाली भीड़ है, 
जो सब कुछ देखकर - जानकर भी अन्जान बनी रहती है और अपने गंतव्य की निकल जाती है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
मंदिर मस्जिद तो बहोत गए, कभी, श्मसान और क़ब्रिस्तान भी घूम आओ,
अपनी ज़िंदगी के अंतिम पड़ाव को, खुली नज़रो से भी तो देख आओ।
- शिवानन्द वर्मा

बेवकूफ हैं वो लोग जो मंज़िलों की तलाश में जद्दोजहद कर रहे हैं,
अरे , ये ज़िन्दगी मौत तक पहुंचने के लिए कभी भी ना खत्म होने वाला संघर्ष है,
और जहाँ संघर्ष खत्म ना हो, वहाँ मंज़िल कैसी ??????
- शिवानन्द वर्मा

🔅
कमाल हो गया
एक दिन हम बाज़ार निकल गए वो भी बिना किसी को बताए, 
बाज़ार में कुछ पुराने दोस्त, मिल गए तो लगे गप्पे लड़ाने।
लगभग आधे घण्टे के बाद एक दोस्त ने अपने मोबाईल में देखा और फिर मुझे
घूरने लगा, बोला भाई घर पर झगड़ा - वगड़ा किया है क्या ? मैं बोला नही यार ऐसा तो
कुछ भी नहीं हुआ, उसने तुरन्त अपने मोबाईल पर फेसबुक एप्प दिखाया।
जिसमें मेरी तस्वीर के नीचे "गुमशुदा" की तलाश और साथ में 10000 रू का इनाम भी
लिखा था, मैं आश्चर्य में पड़ गया ऐसा क्या हो गया ?
बहोत सोचने के बाद एहसास हुआ, मोबाइल साथ नहीं है तभी ये
कमाल हो गया।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
पुराने गानों को नए अंदाज में प्रस्तुत किया जा रहा है,
पर ये भी टिकने वाले नहीं, शीला की जवानी, और मुन्नी की बदनामी,
की तरह ये भी सप्ताह भर चलेंगे फिर विलुप्त हो जाएंगे।
- शिवानन्द वर्मा
🔅 
ऐ ज़िंदगी तुझसे कैसे ये नाते हैं, जीवन यापन के लिए घर से दूर हम बेटे भी,
माँ के आँचल और पिता की छाया को तरस जाते हैं।
- शिवानन्द वर्मा


 🔅
देखो समय की चाल, वैदिक काल में मानवीय जीवन के दो आधार "शिक्षा और स्वास्थ्य"
इन दोनोँ का आदान प्रदान, सेवाभाव से होता था।
वर्तमान में इन्हीं दोनों का व्यापार, भारत की इस धरती पर सामान्य
लोगों के खून चूसने जैसा हो गया है।
बच्चों की पढ़ाई और परिवार के लिए दवाई, इन्हीं के बीच में पिसकर इन्सान, अपने
जीवन के मूल उद्देश्यों की तरफ न जाकर, पतन की खाई में पहुँच रहा है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
व्यस्त रहो मूर्खों अपनी दुनिया में, देश से क्या लेना देना,
हिन्दू वीर नहीं तुम कायर हो, अपने बच्चों को बतला देंना।
समय हाथ से निकल रहा है, जागो देश के लिए, अपनों के भविष्य के लिए।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
एक ज़माना था जब कला के धनी लोग कलाकार / अभिनेता हुआ करते थें।
अब तो पैसे के धनी ,खानदानी और पैदायसी हुआ करते हैं।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
निर्भया के केश में न्याय की जो घटिया प्रक्रिया चल रही है,
अच्छा हुआ हैदराबाद के दरिन्दों को, वहीं ढेर कर दिया गया,
नहीं तो एक और बेटी का परिवार, न्यायालय के चक्कर
काटते काटते ही मिट जाता ।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
जाने क्यों लोग अपने जीवन में पिता के किरदार को भूल जाते हैं, 
अधिक्तर लोगों को सिर्फ माँ ही प्यारी लगती है।
ये कभी मत सोचना की माँ जैसी ममता पिता में नहीं होती, माँ जैसा दुलार नहीं होता,
 सब कुछ होता है, पर तुम्हारे सामने जाहिर नहीं करते, 
नहीं तो तुम और तुम्हारा स्वभाव कोमल हो जाएगा और तुम 
कठोर परिस्थितियों का सामना नहीं कर पाओगे, 
तुम्हारे अंदर मजबूती बनाये रखने के लिए ही पिता कठोर होता है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
थक सा गया हूँ ए ज़िन्दगी चलते - चलते तेरी राहों में,
तुमसे अब इतनी सी ख्वाहिश है, सुला दे मुझे मौत की मौत की बाहों में ।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
बड़ा आश्चर्य हुआ ये देखकर जब माता - पिता बच्चे के एक एक हाथ को पकड़कर
साथ चल रहे थें फिर भी बच्चा गिर पड़ा ,
और मैं सोचता रहा, माता पिता की पकड़ ढीली थी या बच्चे से चूक हो गयी।
- शिवानन्द वर्मा

सप्ताह में एक दिन अकेला भी गुजार लो, अकेले रहने की भी आदतें पाल लो,
वक्त ऐसा भी आना है जब तेरा साथ कोई ना देगा।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
हर परिस्थितियों में सहयोग का डंका पीटने वाले अपने करीबियों को,
अपना सहयोग करने का मौका ज़रूर देना, और यदि ऐसी स्थिति नहीं आयी,
झूठा ही सही आजमाना जरूर, वरना जरूरत पड़ने पर तुम्हें खाली हाथ ही रहना पड़ेगा।
- शिवानन्द वर्मा



🔅
आधुनिक ज़माने के दस्तूर ही कुछ ऐसा है।
तन को झाँकन सब चले, मन को झाँके ना कोय,
हाल ए दिल किसको कहें, सब स्वारथ के बस में होय।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
किसी को कोई पूछने वाला नहीं, वक़्त ने भी कमाल के गुल खिलाएं,
और पूछ भी लो तो सवाल मिलता है, भाई हम तुम्हें कैसे याद आये ???!!!
- शिवानन्द वर्मा
🔅
क्योँ अब आग नहीं तुझमें ? प्रतिशोध का भाव नहीं तुझमें?
हैदराबाद के दरिंदे मर क्या गए? उन्नाव की बेटी के लिए क्यों न्याय नहीं दिल मे?
कड़े अनुशासन ही सुशासन को जन्म दे सकते हैं, अन्धी न्याय प्रणाली नहीं।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
हाँ मैं गलत हूँ,
जब तक मैं दूसरों को गलत समझता ,
तब तक मैं गलत हूँ,
जब तक मैं दूसरों की गलतियां देखता,
तब तक मैं गलत हूँ,
जब तक मैं दूसरों के कार्यों में कमियाँ ढूंढता,
तब तक मैं गलत हूँ,
जब तक मैं अपने आपको नहीं देखता,
तब तक मैं गलत हूँ,
जब तक मैं अपने कार्यों में कमियाँ नहीं ढूंढता,
तब तक मैं गलत हूँ,
मुझमें अपनी कमियाँ ढूढ़ने की ताकत नहीं सिर्फ दूसरों की खामियां देखने की लालसा है,
मैं सर्वदा गलत हूँ, मैं मेरे जीवन के अंत तक सिर्फ और सिर्फ गलत हूँ।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
सिर्फ बलात्कारी ही दोषी नहीं हैं साहब, दोषियों की फेहरिस्त बहोत लंबी है,
समाज का हर तबका छोटा - बड़ा, अमीर - गरीब,
यहाँ तक कि पूरे विश्व को एक सूत्र से जोड़ने वाला इंटरनेट भी दोषी है।
बलात्कारियों के समूहों से पिछ्ले 8 वर्षों निर्भया भी "न्याय" ना पा सकी तो दूसरे क्या पाएंगे।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
सच ही कहा गया है, कोई भी चीज जरूरत से ज्यादा होने पर पतन का रूप अख्तियार कर लेती है।
माँ बाप ने बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए ज्यादा पढ़ाई की सुविधाएँ क्या दी,
बच्चे उन्हें अकेला छोडक़र विदेशो में ही रह लिए, क्या मिला ????
बुढ़ापे में कोई पानी तक नहीं देने वाला या वृद्धाश्रम में पिंजरे में पड़े, पंछियों सी बदहाल जिंदगी।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
कुछ लोग ज़िन्दगी में सफेद चद्दर पर बदनुमे काले दाग की तरह शामिल हो जाते हैं,
जिन्हें ना ही मिटाया जा सकता है, और ना ही अपनाने का दिल करता है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
तुम्हारे घर ब्याह कर आयी हुई बेटी-बहन तुम्हारी अर्धांगिनी है,
एक दूसरे के सुख दुःख दोनों में बराबर का हिस्सेदार,
उसे अपना गुलाम समझने की गलती मत करना।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
महाराष्ट्र की राजनीति, लालच और लालसा के चरम पर है,
अब गौर से कह लो कि हिंदुओं का विश्वास हिन्दू धर्म पर है !
- शिवानन्द वर्मा


🔅
मेरे जन्मदिन पर माँ ने 
अच्छे - अच्छे पकवान बनाये, माथे पर चंदन का टीका लगाया , 
माँ और पिताजी दोनों ने 'जुग-जग जियो मेरे लाल' का आशीर्वाद दिया।
मैनें पूछ लिया माँ आपका और पिताजी का जन्मदिन कब आता है?
दोनों ने एक साथ जबाब दिया - बेटा हमारा भी जन्मदिन आज ही है,
मैंने हँसते हुए पूछा वो कैसे ?

माँ ने जबाब दिया - 
जिस दिन हमने तुम्हे जन्म दिया उसी दिन तुमने हमें जन्म दिया, 
मैं माँ बनी और ये पिता बने, इस तरह आज हम सबका जन्मदिन है।
वो दिन मेरी ज़िंदगी का सबसे खुशनसीब दिन बन गया।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
सोशल मीडिया पर पढ़ लिए, खाना बचे तो फेंकना मत किसी गरीब को खिला देना,
अब शहर में बिस्किट और मांसाहार खाने वाले कुत्तो को शाकाहारी भोजन तो पसंद नहीं, तो निकल दिए गरीब ढूढ़ने आधे घंटे से 3-4 रास्तों पर भटके पर कोई गरीब नहीं मिला,
पर 2-3 गरीब पॉकेट मारों ने हमें ही गरीब बना दिया।
कई दिनों से उस पोस्ट करने वाले को ढूंढ रहा हूँ किसी को मिले तो भाई ज़रा हमें बता देना।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
पढ़े लिखों की बढ़ती तादात भी बेरोजगारी की वजह बन रही है,
अपनी शिक्षा के अनुसार नौकरी ढूढ़ने के चक्कर में,
कुछ भी सीखने की अवस्था ऐसे ही बेकार हो रही है,
उम्र ढल रहा है, ज़िन्दगी बदहाली में गुज़रने को लाचार हो रही है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
कांग्रेस मुक्त और बीजेपी मुक्त भारत के सपने, देखने वालों,
क्या तुमने कभी नशामुक्त भारत के सपने देखे ? भला क्यों देखोगे ?
अपने घरों की आग किसी को दिखाई नहीं देती,
दूसरों के घरों की चिंगारी सबको दिख जाती है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
बदल गया सामाजिक परिवेश, इंटरनेट पर हो रहे नंगे नाच ने, समरसता का दमन कर दिया,
अश्लीलता के वाहक सोशल मीडिया ने हमारे संस्कारों का हनन कर दिया।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
जिन कीचड़ जैसी परिस्थितियों को जानकर ,देखकर,
लोग उनसे मुँह मोड़ कर कोशों दूर चले जाते हैं,
कम्बख्त वक़्त का थपेड़ा उसी में लिपटने को मजबूर कर देता है।
- शिवानन्द वर्मा

🔅
हिंदू त्यौहारों पर अग्रिम बधाइयाँ देकर, हिन्दू धर्म का उपहास न करें।
बधाइयाँ देना आपकी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आपके मन में उस पर्व के प्रति
श्रद्धा और विश्वास को दर्शाता है।
🙏🙏त्यौहार वाले दिन ही बधाई दें, जिससे लोग उस दिन के महत्व को समझें। 🙏🙏
- शिवानन्द वर्मा
🔅
उम्र का पड़ाव भी अजीब है, अब कान तरस गए हैं,
एक बार माता-पिता नाम लेकर पुकार लें, तो दिल को बहोत सुकून मिले।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
हर कोई सोचता है, हमारी बेटी- बहन को अच्छा जीवन साथी मिले,
जो नशा ना करता हो, जुए ना खेलता हो, दूसरे की बहन- बेटियों को बुरी नज़रों से ना देखता हो।
अरे हरामखोरों कभी खुद के अंदर देखा, तुम्हें भी किसी ने अपनी बहन -बेटी दी है,
उसने भी तो यही सोचा होगा ।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
खुशियां तो बस कुछ पल की होती हैं, इनके लिए दिल में बस एक कोना है,
बाकी जगहें गमों के हिस्से, सच में यह मिट्टी  का एक खिलौना है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
पहले लोग कहते थें बच्चों में भगवान का वास होता है, बच्चे झूठ नहीं बोलते
परन्तु आज का सच ये है, कल युग इतना प्रभावी हो गया है कि,
2 वर्ष का बच्चा भी इतनी मासूमियत से झूठ बोलता है,
कि भगवान भी अब उनके अंदर विराजमान नहीं होना चाहेंगे।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
आधुनिक समय में संयुक्त परिवार को सुचारू रूप से चला पाना,
मेरे नजरिए से, दुनिया का सबसे बड़ा काम है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
वक़्त की रफ़्तार में, इंसानियत यूँ खो गई,
रिश्तों की डोर, शोशल मीडिया में कैद हो गई।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
सिसायत की गर्मी ठंड पड़ गयी, सूरज ने गर्मी कहर बरपाया है,
A C में बैठने वाले क्या जानें, पत्थरों को भी पसीना आया है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
परस्पर निर्भरता ने जोड़ रक्खा था एक दूसरे को,
पैसे पर निर्भरता ने, जैसे मोतियों से जड़ी माला टूटने पर
मोती बिखर जाती हैं ऐसे ही बिखेर दिया।
- शिवानन्द वर्मा

🔅
ज़िन्दगी की अंगड़ाइयां भी अजीब होती हैं,
जब भी करवट बदलती है, तो कुछ ना कुछ अनहोनी ही होती है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
धनोपार्जन का जरिया तो सिर्फ और सिर्फ मेहनत ही है, और कमाई संभवतः निश्चित धनराशि है।
लेकिन खर्च जरूरत के हिसाब से भी करें, फिर भी तमाम ऐसे समस्याएं आ जाएंगी
जिसमें कई महीनों की कमाई झटके में चली जाए।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
गूँज उठे इस धरती पर, जय श्रीराम का नारा हो,
मर्यादा पुरुषोत्तम के सपनों का, फिर भारत वर्ष हमारा हो।
।। जय श्री राम ।।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
रक्तदान ही माह दान है, जो जीवनदायी है,
रक्तदान करके मैंने, दुनिया की सबसे बड़ी खुशी पायी है।
रक्तदान । महादान
- शिवानन्द वर्मा
🔅
जिस तरह वक़्त बड़े से बड़े घाव को भर देता है,
ठीक उसी तरह वक़्त छोटे से फोड़े को नासूर भी बना देता है।
जो जीवन भर रह रह कर दर्द देता रहता है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
दुनिया का सबसे कड़वा सच
लड़कियाँ खूबसूरत नहीं होती, फिर भी लोग उनकी तारीफ करते
हुए कहते हैं, तुम बहोत खूबसूरत हो
साक्ष्य - मेकअप के सामानों की बंपर बिक्री
           इस बात पर मुहर लगाती है।
- शिवानन्द वर्मा
🔅
मैं टिक -टिक ही, सही पर निरंतर हूँ, ज़िन्दगी की बुलंदियों को
छूना चाहते हो, तो निरंतर कर्म करो, आलास करोगे तो मिट जाओ
- शिवानन्द वर्मा
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योग दिवस जब आई गयो, योग करे हर कोय,
टूट ना जाये जब तक हड्डी , योग सफल ना होय।
- शिवानन्द वर्मा

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मेरे दुःख में और मेरे सुख में जो हर पल खड़ी है,
ऐ दुनिया वालों ये जान लो, वो कोई और नहीं,
मेरी प्यारी गुड़िया बचपन की मेरी परी है।
- शिवानन्द वर्मा
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हालात पुरुषों के हृदय को इस तरह से पाषाण बना देते हैं,
की लाख चाहने पर भी रोकर अपने मन को सांत्वना नहीं दे सकते।
- शिवानन्द वर्मा
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वक़्त के दिये जख्म उम्र भर याद रहते हैं,
पर उन मरहमों का क्या, जिनसे वक़्त ने कितने ही जख्मों को भर दिया ।
- शिवानन्द वर्मा
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मुर्ख हैं वो शहरी लोग जो सोचते हैं सरकार किसानों का कर्ज माफ करती है,
सरकार शहरी लोगों को किसान कर्जमाफी के नाम पर खाद्यानों पर सब्सिडी देती है।
यदि सरकार खाद्यानों की कीमत बढ़ा दे तो किसान थोड़ा सुखी तो हो जाएगा,
मगर हर एक शहरी खरीददार रविवार के दिन,
बढ़ती महंगाई की तख्ती लेकर रोड जाम करता हुआ नजर आएगा।
- शिवानन्द वर्मा
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सुबह से लेकर शाम तक, शोशल मीडिया पर,
सैकड़ों सुविचार पढ़ लिये जाते हैं, और मन द्रवित भी हो उठता है।
पर अपनी दिनचर्या में किसी भी सुविचार को जगह नहीं मिल पाती।
- शिवानन्द वर्मा
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कभी जो पड़ोसी ज़रूरत के सामानों के लिए दरवाज़े की मिट्टी खाया करते थे,
आज अपने आपको सबसे रईस समझने लगे,
हमारे खेतों में काम कर करके जिनका पेट भरता था,
आज वही हमें दौलत की धौंस दिखाते है।
- शिवानन्द वर्मा
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अब समय आ गया है, पाप को नहीं पापी को ही मार दो,
पाप को मारते मारते इतना समय लग जाता है कि हज़ारों पापी पैदा हो जाते है।
एक पापी को मारोगे, तो हज़ार पाप रुक जाएंगे।
- शिवानन्द वर्मा


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फूलों की किस्मत भी देखो ज़नाब,
कुछ कब्रों को नसीब होते, कुछ मंदिरों में चढ़ा दिए जाते हैं,
कुछ सूखकर डाली से जुदा होकर, पैरों के नीचे दबा दिए जाते हैं। 
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इंसानी ज़िन्दगी भी कुछ ऐसी ही हो गई है,
कोई अच्छी पढ़ाई करके भी बड़ी मुश्किल से सरकारी नौकरी पाता है,
जिसको ढंग से कलम भी पकड़ना नहीं आता,
वो घूसखोरी के दम पर सरकारी बाबू बना नज़र आता है,
कोई ऊँची पढ़ाई करके, विदेश में शिफ्ट हो जाता है,
कोई मेहनत करके फसलें उगाता है,
और वही मेहनतकश मौसम की मार सह सह कर,
कर्ज़ तले दब जाता है, हालात ऐसे हो जाते हैं,
भूख अपने चरम पर होती है,
देश का पेट भरने वाला एक दिन भूखा ही मर जाता है।
- शिवानन्द वर्मा
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जिंदगी बिल्कुल फ़िल्मी लगने लगी है, मगर कमबख्त 3 घण्टे में The End नहीं होती।
- शिवानन्द वर्मा
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उस धन वैभव का कोई मोल नहीं, जिससे तन मन चैन ना पावे हो,
सुख शान्ति मिले जब तन मन को, जन्म सफल हो जावे हो।
मात पिता की, चरण में जो सुख, हृदय को चैन दिलावै हो,
मोह माया के वसीभूत हो, वो सुख फिर लौट के ना आवै हो।
- शिवानन्द वर्मा
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आज कल सोशल मीडिया पर बिग बॉस के लिए बहोत हो हल्ला मचा हुआ है,
मूर्ख हो तुम सब हल्ला ही मचाना है तो उनको आईना दिखाओ, 
जो पैसे के लिए सारे आम टी वी पर इस प्रोग्राम में अश्लीलता को स्वीकार कर रही हैं।
- शिवानन्द वर्मा


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